“Then, O wise one! The tale of honesty Is ever new for you, ever new!”
तब, हे बुद्धिमान! ईमानदारी की बातें तो तुम्हारे लिए सदा नई की नई ही हैं।
यह दोहा, जो सुजान नामक व्यक्ति या किसी 'ज्ञानी' इंसान को संबोधित है, उसमें थोड़ी सी व्यंग्यात्मकता छिपी है। वक्ता मज़ाकिया अंदाज़ में कहता है, "वाह सुजान! ईमानदारी की बात तो तुम्हारे लिए हमेशा नई-नई ही रहती है, है ना?" इसका मतलब है कि यह व्यक्ति ईमानदारी के बारे में अक्सर बातें तो करता है, लेकिन शायद हमेशा उसके सिद्धांतों पर चलता नहीं। ऐसा लगता है मानो वह ईमानदारी को बार-बार नए सिरे से खोज रहा हो, जो उसकी कथनी और करनी में एक फर्क दर्शाता है। यह दोहा धीरे से यह बताता है कि कैसे कुछ लोग गुणों के बारे में ऐसे बात करते हैं जैसे उन्होंने उन्हें अभी-अभी जाना हो, जबकि वे उन्हें वास्तव में अपने जीवन में उतारते नहीं।
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