“Look within: where has Hari hidden, oh...ji?A hundred hundred salutations.”
भीतर तो देखो: हरि कहाँ छिप गए हैं, जी? सैकड़ों सलाम।
यह खूबसूरत दोहा हमें अपने भीतर देखने के लिए आमंत्रित करता है। यह पूछता है, 'हरि, यानी ईश्वर, कहाँ चले गए हैं?' इसका गहरा अर्थ यह है कि ईश्वर किसी बाहरी स्थान पर या दूर नहीं मिलेंगे, बल्कि वे हमारे अंदर ही निवास करते हैं। यह हमें आत्म-चिंतन करने और अपने हृदय तथा आत्मा में ईश्वर की उपस्थिति को खोजने का आग्रह करता है। 'सौ-सौ रे सलामूं' वाक्यांश इस आंतरिक सत्य के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करता है, यह स्वीकार करते हुए कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर ही पवित्रता बसी हुई है। यह एक सौम्य स्मरण है कि ईश्वर को खोजने की यात्रा हमारे अंदर झाँकने से ही शुरू होती है।
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