“The world will taunt: 'The self-knower did not arrive!'The proud one did not appear, having recognized his own flaw!”
दुनिया ताना मारेगी कि 'आत्मज्ञानी नहीं आया!' अभिमानी नहीं आया क्योंकि उसने अपनी कमजोरी पहचान ली थी।
यह दोहा उस प्रवृत्ति को दर्शाता है जहाँ दुनिया सच्चे ज्ञानी या आत्मज्ञानी की अनुपस्थिति पर कटाक्ष करती है। जब ऐसे प्रबुद्ध आत्माएं आवश्यकता के समय प्रकट नहीं होतीं, तो लोग उन पर टिप्पणी करते हैं। परंतु, इसका एक दूसरा पहलू भी है: अहंकारी व्यक्ति, जो झूठे घमंड से भरा होता है, आगे नहीं आता। ऐसा क्यों? क्योंकि गहराई से वह अपनी खोखली पहचान और सीमाओं को पहचान लेता है। उसे पता होता है कि उसका ज्ञान सतही है और वह उजागर होने से डरता है। इसलिए, जहाँ दुनिया सच्चे ज्ञानी की कमी पर अफसोस करती है, वहीं अहंकारी की अनुपस्थिति उसकी अपनी अपर्याप्तता की स्वीकृति है, उसकी अपनी 'कमजोरी' की एक शांत स्वीकारोक्ति।
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