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વાયરા ઉપર પોઢતી ઓઢું. - ચૂંદડી
ચૂંદડી ચાર છેડલે ફાટી

Upon the wind I rest, and drape my chundadi,My chundadi, torn now at its four ends.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

मैं हवा पर विश्राम करती हूँ और अपनी चुनरी ओढ़ती हूँ। मेरी चुनरी अब चारों कोनों से फटी हुई है।

विस्तार

यह दोहा एक बहुत ही नाजुक और हल्की चुनरी का सुंदर वर्णन करता है। पहली पंक्ति में कहा गया है कि चुनरी इतनी कोमल है मानो वह हवा पर ही टिकी हो, बड़ी आसानी से हवा में लहरा रही हो। लेकिन दूसरी पंक्ति एक विपरीत सच्चाई बताती है: वही चुनरी अपने चारों कोनों से फट गई है। यह खूबसूरत चीज़ों की क्षणभंगुरता को दर्शाता एक मार्मिक दृश्य है। यह बताता है कि जीवन के सबसे नाजुक और अछूते पहलू भी, जैसे कि दिल या कोई रिश्ता, अंततः टूट-फूट का अनुभव कर सकते हैं, जो हम सभी पर समय और परिस्थितियों के प्रभाव को उजागर करता है।

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