ભાઈ હો કે ભતરીજો
સાદ પાડે ‘શેઠ, લીજો!’
“Whether it's a brother or nephew,They call out, 'Sir, take it!'”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
चाहे भाई हो या भतीजा, वे आवाज लगाते हैं, 'सेठ, ले लो!'
विस्तार
यह दोहा बड़े मज़ेदार तरीके से बताता है कि कैसे कभी-कभी व्यापार या लेनदेन रिश्तों पर भारी पड़ जाते हैं। इसका अर्थ है, 'चाहे वह आपका भाई हो या भतीजा, फिर भी वह पुकारेगा, "सेठ, ले लो!"' यह उस विक्रेता की तस्वीर पेश करता है जो भले ही आपका रिश्तेदार हो, लेकिन व्यापार के दौरान आपको 'सेठ' कहकर संबोधित करता है, ताकि आप उससे कुछ खरीद लें। यह हमें याद दिलाता है कि कुछ ख़ास परिस्थितियों में, जैसे व्यापार में, पेशेवर भूमिका पारिवारिक रिश्तों से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, अक्सर थोड़ी-सी विडंबना के साथ।
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