“One might think it's some ascetic yogi; a rattle,My dear sister sucks that rattle all day long.”
लगता है जैसे कोई जोगी या अवधूत हो; यह एक घुंघरू है। मेरी प्रिय बहन उस घुंघरू को दिनभर चूसती रहती है।
यह दोहा 'घूघरो' नामक एक स्वादिष्ट मीठे पकवान का सुंदर चित्रण करता है। पहली पंक्ति इसे 'योगी अबधूत' से तुलना करती है, जो संसारिक मोह-माया से पूरी तरह विरक्त होता है। दूसरी पंक्ति में कहा गया है कि एक प्रियतमा या बहन (बेनडी) दिन भर, चारों पहर, इस घूघरो को बड़े चाव से चूस रही है। यह दृश्य गहरी और निरंतर संतुष्टि को दर्शाता है। जैसे एक योगी अपनी साधना में लीन रहता है, उसी तरह वह महिला इस मीठे पकवान का हर अंश पूरी तन्मयता से आनंद ले रही है। यह दिखाता है कि कैसे एक साधारण सी चीज़ भी गहन और स्थायी खुशी दे सकती है।
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