‘પો! પો! ત્રો! ત્રો!’ સાંભળતી-
લેર પડત જો હોત નદી.
“Hearing 'Po! Po! Tro! Tro!' sounding now, Oh, if a wave would grace the river's brow!”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
‘पो! पो! त्रो! त्रो!’ की ध्वनि सुनते हुए, काश कोई नदी होती और उसमें लहर उठती।
विस्तार
यह दोहा नदी के प्रति गहरी लालसा व्यक्त करता है। "पो! पो! त्रो! त्रो!" की ध्वनियाँ शायद नावों या जहाजों की, या नदी किनारे बजने वाले किसी हॉर्न की याद दिलाती हैं। कवि कल्पना करता है, "अगर यह नदी होती, तो लहरें उठतीं।" यह एक बहती हुई नदी की उपस्थिति की गहरी इच्छा को दर्शाता है, जो केवल पानी की हलचल और कोमल लहरें ही नहीं, बल्कि नदी से जुड़े ध्वनि और जीवन को भी लाती है। यह प्रकृति की शांत और जीवंत उपस्थिति को याद करने की एक सुंदर अभिव्यक्ति है।
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