“Awake, O slaves of the ages! The divine abode is seen:On the throne of justice, dreadful Time awakens-”
हे युगों के गुलामों, जागो! दिव्य धाम दिखाई दे रहा है। न्याय के सिंहासन पर भयानक काल जागृत हो रहा है।
यह दोहा आध्यात्मिक जागरण का एक सशक्त आह्वान है। यह हमें, 'संसार के गुलामों' को, हमारी सांसारिक मोहमाया और बंधनों से जागने का आग्रह करता है। यह बताता है कि 'दिव्य धाम' या उच्चतर सत्य अब दृष्टिगोचर है, जिसका अर्थ है कि आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग स्पष्ट है। यह दोहा एक गंभीर चेतावनी के साथ समाप्त होता है: 'न्याय के सिंहासन पर भयानक काल जागता है।' यह दर्शाता है कि अंतिम न्याय का क्षण या समय और मृत्यु की अथक शक्ति अब निकट है, न्याय के सिंहासन पर बैठी है। यह जीवन की नश्वरता को समझने, हमारे कर्मों पर विचार करने और बहुत देर होने से पहले आध्यात्मिक सत्य की तलाश करने का एक गहरा संदेश है। यह इस बात पर जोर देता है कि हमारे कर्मों का अंततः दिव्य परीक्षण होगा।
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