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મુક્તિને ક્યારે નિજ રક્તો રેડણહારે
પાયો કસુંબીનો રંગ. -રાજ.

Only when for freedom, their own blood was spilled,Was kasumbī's hue, within their spirit filled.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

मुक्ति तभी प्राप्त हुई जब लोगों ने अपना रक्त बहाया, और उनकी आत्माओं में कसुंबी का रंग भर गया।

विस्तार

राज द्वारा रचित यह प्रेरक दोहा स्वतंत्रता के लिए दिए गए परम बलिदान की बात करता है। कवि पूछता है, 'अपने रक्त की आहुति देने वाले वीरों के द्वारा स्वतंत्रता को कब कसुंबी रंग से रंगा जाएगा?' यहाँ कसुंबी रंग केवल एक रंग नहीं, बल्कि त्याग, शौर्य और वैराग्य का गहरा प्रतीक है। कवि यह दर्शाना चाहते हैं कि सच्ची मुक्ति सस्ती नहीं होती; यह शहीदों के बहुमूल्य रक्त से खरीदी जाती है। यह हमें उन वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने अपना जीवन न्योछावर किया, इस आशा के साथ कि उनके बलिदान से प्राप्त स्वतंत्रता गहन अर्थ और निस्वार्थता की भावना से भरी होगी।

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