ધરતીનાં ભૂખ્યાં કંગાલોને ગાલે
છલકાયો કસુંબીનો રંગ;
“On the cheeks of the earth's hungry and destitute,The kasumbi color overflowed.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
धरती के भूखे कंगालों के गालों पर कसूंबी रंग छलक उठा।
विस्तार
यह दोहा एक गहरी जागृति को जीवंत रूप से चित्रित करता है। यह दुनिया के भूखे और दरिद्र लोगों की बात करता है, जिनके चेहरे पर, उनके संघर्षों के बावजूद, अचानक 'कसूंबी' रंग छलक उठा है। यह केवल एक रंग नहीं है; यह साहस, जुनून और अक्सर क्रांति की एक गहरी, जीवंत भावना का प्रतीक है। यह बताता है कि घोर कठिनाई के बीच भी, इन दबे-कुचले व्यक्तियों के भीतर आशा या परिवर्तन की एक शक्तिशाली, अटूट अग्नि प्रज्वलित हो गई है, जो उनके दुखों को दूर करने के लिए एक जोशीले संकल्प को दर्शाती है।
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