મા જાણે હીંચકોરતી વઈ ગઈ,
હાલાંના સૂર થોડા વેરતી ગઈ. -કોઈ દી.
“Mother, as if swaying, went away,Scattering a few lullaby tunes. -Someday.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
माँ जैसे झूलते हुए चली गई, लोरी के कुछ सुर बिखेरती हुई। यह किसी दिन की बात है।
विस्तार
यह प्यारा दोहा माँ की कोमल विदाई का एक सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। ऐसा लगता है जैसे वह धीरे-धीरे झूलते हुए, किसी झूले की तरह, चली गई। जाते हुए, उसने अपनी मीठी लोरी की धुनें बिखेर दीं, उन्हें अनमोल यादों की तरह छोड़ गई। यह माँ के प्यार और सुकून की स्थायी छाप को खूबसूरती से दर्शाता है। उनके जाने के बाद भी, उनकी शांत करने वाली आवाज़ और उपस्थिति की गूँज बनी रहती है, जो गर्माहट और शांति का एहसास कराती है। यह माँ के साथ गहरे और स्थायी बंधन पर एक भावुक चिंतन है, अतीत से एक सुकून भरी फुसफुसाहट।
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