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શ્રાવણની કોક કોક વે’લી સવારમાં
સાંભરી આવે બા-

On certain early mornings of Shravan, My mother comes to mind.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

श्रावण की कुछ शुरुआती सुबहों में, मेरी माँ याद आती हैं।

विस्तार

यह खूबसूरत दोहा सावन के महीने की शांत, सुबह की शुरुआती बेला का वर्णन करता है। जब हल्की बारिश होती है और चारों ओर ताज़गी होती है, तब एक शांत और चिंतनशील माहौल बन जाता है। ऐसे ही सुकून भरे पलों में, कवि के मन में 'बा' यानी माँ की याद आती है। यह दोहा माँ की यादों से जुड़ी गहरी भावना और स्नेह को खूबसूरती से दर्शाता है। यह बताता है कि कैसे कुछ ख़ास समय या मौसम, जैसे सावन की शांत सुबहें, अनायास ही प्रियजनों, ख़ासकर माँ की आरामदायक उपस्थिति और उनकी प्यारी यादों को हमारे ज़हन में ताज़ा कर देती हैं। इन पंक्तियों में एक दिली लालसा और शाश्वत प्रेम का अनुभव होता है जो समय से परे है।

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