Sukhan AI
નવા વર્ષ તણાં નીમક ક્યાં સમાવું! -વા'લાં.
પાંપણ ને પોપચાંમાં સબરસ છલકાય મારે,

Where shall I contain the new year's tears, O beloved? A flood of emotions overflows from my eyelids.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

नए साल के आँसुओं को कहाँ समाऊँ, हे प्रिय? मेरी पलकों और पलकों से सभी भाव उमड़ रहे हैं।

विस्तार

यह प्यारा दोहा नए साल के आगमन पर उमड़ने वाली गहरी भावनाओं को व्यक्त करता है। कवि पूछते हैं कि नए साल के 'नमक' को कहाँ समेटूँ! यहाँ 'नमक' नए संकल्पों, उम्मीदों और साथ ही पुरानी यादों या आने वाली चुनौतियों के खारेपन का प्रतीक है। ये भावनाएँ इतनी प्रबल हैं कि उन्हें रोकना मुश्किल है। आँखों की पलकों और पुतलियों से 'सबरस' यानी सभी रसों का मिश्रण छलक रहा है, जिसका अर्थ है आँसू जो खुशी, दुख, उम्मीद और दृढ़ता जैसे हर भाव का संगम हैं। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हृदय की अनियंत्रित भावनाओं का मार्मिक चित्रण है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.