આકુલ પ્રાણ કોને કલસાદ કરે
મન મોર બની થનગાટ કરે.
“Who brings solace to the agitated soul?My mind, a peacock, dances, losing all control.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
परेशान आत्मा को कौन शांति देगा? मेरा मन मोर की तरह उमंग और ऊर्जा से नाचता है।
विस्तार
यह सुंदर दोहा मन की अद्भुत क्षमता और उमंग को दर्शाता है। यह कहता है कि भले ही हमारी आत्मा बेचैन हो, किसी की तलाश में हो या किसी को पुकार रही हो, फिर भी मन में एक अविश्वसनीय शक्ति है। वह एक मोर की तरह बन जाता है और थिरकने लगता है, पूरी उमंग और उत्साह के साथ नाच उठता है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारे भीतर हमेशा आनंद और आत्म-अभिव्यक्ति का एक स्रोत मौजूद है, जो आंतरिक उथल-पुथल या प्रश्नों के बीच भी प्रकट होने और जश्न मनाने के लिए तैयार है। मन एक जीवंत मोर बनकर शुद्ध, अनियंत्रित खुशी से नाचता है।
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