આવે મંગળ અવસરે, કોણ વિલાપ કરે!
કાયરતાને આંસુડે કોનાં નેન રડે!
“At such an auspicious occasion, who would lament?With tears of cowardice, whose eyes would weep?”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
शुभ अवसर पर भला कौन विलाप करता है? कायरता के आँसुओं से किसकी आँखें रोती हैं?
विस्तार
यह दोहा हमें याद दिलाता है कि जब कोई शुभ अवसर या खुशी का पल आता है, तो यह दुख या विलाप करने का समय नहीं होता। यह प्रश्न करता है कि कोई खुशी के मौके पर भला क्यों रोएगा। दूसरी पंक्ति में बड़ी शक्ति से पूछा गया है कि किसकी आँखें कायरता के आँसुओं से रोती हैं। इसका मतलब है कि डर या कमजोरी के कारण आँसू बहाना कायरता की निशानी है। यह हमें मजबूत बनने, खुशी को अपनाने और जीवन के पलों का साहस के साथ सामना करने का संदेश देता है, न कि डर या कमजोरी के आगे झुकने का।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
