घट का परदा खोलकर , सन्मुख दे दीदार। बाल सने ही सांइया , आवा अन्त का यार॥ 108॥
“By lifting the veil of the pot, he granted his sight. O beloved, whose youth is adorned, and whose voice is sweet delight.”
— कबीर
अर्थ
घट का परदा खोलकर, उन्होंने सामने दीदार दिया। हे सांवले प्यारे, आपके बाल सजे हुए हैं और आपकी आवाज़ मधुर आनंद है।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में ईश्वर के दर्शन को बहुत ही प्यारे अंदाज़ में समझाते हैं। 'घट का परदा खोलना' मतलब हमारे मन पर पड़ी दुनियावी माया और भ्रम की पर्त को हटाना, ताकि हम सीधे उस परमात्मा का दीदार कर सकें। वह साईं, जो हमेशा प्रेम और यौवन से भरा रहता है, वही हमारा सच्चा यार है – जो हमारे जीवन के आरंभ से अंत तक हमारा साथ निभाता है, यानी उनका प्रेम कालातीत है।
