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सब आए इस एक में , डाल-पात फल-फूल। कबिरा पीछा क्या रहा , गह पकड़ी जब मूल॥ 112॥

All things, be it branches, leaves, fruits, or flowers, are gathered in this one; what was Kabir following, when he grasped the root.

कबीर
अर्थ

सब कुछ, चाहे वह शाखाएं हों, पत्ते हों, फल हों या फूल, ये सब इस एक में समाहित हैं; जब कबीर ने मूल को पकड़ लिया, तो वह किसका पीछा कर रहा था।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि जैसे पेड़ की डालियाँ, पत्ते, फल और फूल सब एक ही जड़ से जुड़े होते हैं, वैसे ही जीवन की हर चीज़ किसी एक मूल स्रोत से निकली है। कबीर जी हमसे पूछते हैं कि जब हमने उस गहरी जड़ को ही पकड़ लिया है, तो फिर बाहरी दिखावों या ऊपरी चीज़ों के पीछे भागना क्यों? उनका इशारा है कि असली ज्ञान और शांति बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि जीवन के मूल सत्य को समझने में है।

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