Sukhan AI
साधु सती और सूरमा , इनकी बात अगाध। आशा छोड़े देह की , तन की अनथक साध॥ 135॥

Of the saint, the devoted woman, and the heroic man, their words are profound. Forsaking hope in the body, the ceaseless effort of the soul.

कबीर
अर्थ

साधु, सती और सूरमा—इनकी बातें गहरी हैं। शरीर की आशा छोड़कर, आत्मा का अथक साधना करना चाहिए।

विस्तार

जब कबीर कहते हैं कि साधु, सती और सूरमा की बातें अगाध होती हैं, तो उनका मतलब है कि इनकी समझ बहुत गहरी है। ये तीनों देह की आशाओं और मोह-माया को छोड़कर, अपनी आत्मा की अथक साधना में लगे रहते हैं। वे हमें दिखाते हैं कि सच्चा ज्ञान और बल तभी मिलता है, जब हम शरीर की सीमाओं से ऊपर उठकर आत्मा के अनंत सफर पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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पाठ
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