Sukhan AI
अटकी भाल शरीर में , तीर रहा है टूट। चुम्बक बिना निकले नहीं , कोटि पठन को फूट॥ 139॥

A trapped body in the chest, a dart is breaking through. Without a magnet, the million readings cannot be found.

कबीर
अर्थ

अटकी भाल शरीर में, मानो कोई तीर शरीर में टूटकर अटक गया हो। बिना चुंबक के, लाखों पाठों में भी उस चीज़ को निकालना संभव नहीं है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ मन की गहरी उलझनों और सांसारिक मोह को एक ऐसे तीर के रूपक से समझा रहे हैं, जो शरीर में अटक गया है और टूट रहा है। वे कहते हैं कि जिस तरह ऐसे गहरे फँसे तीर को निकालने के लिए चुंबक की ज़रूरत होती है, वैसे ही हमारी अज्ञानता और मोह को केवल बाहरी ज्ञान या 'लाखों पाठ' पढ़कर नहीं हटाया जा सकता। सच्चा ज्ञान, जो 'करोड़ों पाठ' से भी बढ़कर है, तभी प्रकट होता है जब हम अपने भीतर भक्ति और सच्ची लगन का 'चुंबक' जागृत करते हैं। यह एक अंदरूनी खोज है जो हमें मुक्ति की राह दिखाती है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.

← Prev38 / 10