कथा कीर्तन कुल विशे , भव सागर की नाव। कहत कबीरा या जगत , नाहीं और उपाय॥ 176॥
“The lineage of stories and devotional songs, the boat across the ocean of existence. Kabir says that there is no other way.”
— कबीर
अर्थ
कथा और कीर्तन ही कुल विशेष हैं, जो भवसागर की नाव हैं। कबीर कहते हैं कि इस जगत में कोई और उपाय नहीं है।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में जीवन को 'भव सागर' यानी एक विशाल और कठिन संसार रूपी समुद्र की तरह देखते हैं। इसे पार करने के लिए वे 'कथा कीर्तन' की परंपरा को एक मज़बूत और विश्वसनीय नाव बताते हैं। उनका कहना है कि आध्यात्मिक बातें, भक्ति गीत और ईश्वर की कहानियाँ ही हमें जीवन की चुनौतियों और दुखों से निकालने का एकमात्र ज़रिया हैं। कबीर हमें बड़े प्रेम से समझाते हैं कि इस संसार में और कोई दूसरा रास्ता नहीं है, बस यही सहारा है।
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