कबीर जात पुकारया , चढ़ चन्दन की डार। वाट लगाए ना लगे फिर क्या लेत हमार॥ 180॥
“Kabir called out the caste, climbing the sandalwood path. What else should we take, if we are not attached to the ways?”
— कबीर
अर्थ
कबीर ने जाति का पुकार किया और चंदन के मार्ग पर चढ़ गए। यदि हम रास्तों से विमुख हैं, तो और क्या ले सकते हैं।
विस्तार
कबीरदास जी यहाँ जात-पात या सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर एक गहरे सत्य की बात कर रहे हैं। 'चंदन की डार' एक सुंदर पर निश्चित मार्ग की तरह है, जो हमें बाहरी आडंबरों और रीति-रिवाजों से बाँध रखता है। वो कहते हैं कि अगर हम इन ऊपरी लगाव और पहचानों से चिपके रहेंगे, तो सही रास्ते से भटक जाएँगे। असल मुक्ति तभी मिलेगी जब हम इन सब मोह-माया को त्यागकर अपने भीतर के सत्य को पहचानेंगे।
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