Sukhan AI
संगति सों सुख्या ऊपजे , कुसंगति सो दुख होय। कह कबीर तहँ जाइये , साधु संग जहँ होय॥ 232॥

From good company springs happiness, from bad company arises sorrow. Kabir says, wherever you go, remain with the company of the saint.

कबीर
अर्थ

अच्छी संगति से सुख उत्पन्न होता है, और बुरी संगति से दुख होता है। कबीर कहते हैं कि तुम्हें हमेशा साधु (सज्जन) की संगति में रहना चाहिए।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि हमारी संगति का हमारे मन पर कितना गहरा असर होता है। जैसे उपजाऊ ज़मीन में बीज फलता-फूलता है, वैसे ही अच्छी संगत में मन आनंदित होता है और बुरी संगत में मुरझा जाता है। कबीर दास जी हमें यही सलाह देते हैं कि हमें हमेशा ऐसे लोगों के साथ रहना चाहिए जो हमें सही राह दिखाएं और जीवन में खुशियाँ भरें। उनकी सीख है कि जहाँ सज्जन लोग हों, वहीं हमारा ठिकाना होना चाहिए, क्योंकि वही सच्चा सुख देते हैं।

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पाठ
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