Sukhan AI
भारी कहौं तो बहुडरौं , हलका कहूं तौ झूठ। मैं का जाणी राम कूं नैनूं कबहूं न दीठ॥ 268॥

If I speak the truth, I will be feared, if I speak lightly, I am a liar. How can I know that Rama's eyes never look at me?

कबीर
अर्थ

यदि मैं भारी बात कहूँ तो मुझे डरेंगे, और यदि मैं हल्की बात कहूँ तो मुझे झूठा मानेंगे। मैं कैसे जानूँ कि राम की आँखें कभी मेरी तरफ नहीं देखेंगी।

विस्तार

यह दोहा सत्य कहने की दुविधा को कितनी खूबसूरती से दिखाता है! कबीर दास जी कहते हैं कि अगर मैं गहरी सच्चाई बताऊँ तो मुझे बहुत डर लगता है, पता नहीं लोग कैसे समझेंगे; और अगर मैं हल्की बात कहूँ तो वह झूठ ही होगी। फिर वे पूछते हैं कि मैं राम को कैसे जान सकता हूँ, जबकि मेरी आँखों ने उन्हें कभी देखा ही नहीं? यह सवाल सिर्फ देखने भर का नहीं है, बल्कि यह बताता है कि ईश्वर हर जगह, हर पल मौजूद हैं और उनकी नज़र हम पर हमेशा रहती है, भले ही हम उन्हें अपनी आँखों से देख न पाएँ।

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पाठ
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