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~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~* भगति बिगाड़ी कामियां , इन्द्री केरै स्वादि। हीरा खोया हाथ थैं , जनम गँवाया बादि॥ 276॥

Beggars of devotion, indulging in desire, they lose diamonds from their hands, and waste their lives.

कबीर
अर्थ

भक्ति को बिगाड़ने वाली कामुकता, इंद्रियों को स्वादिष्ट लगती है। इससे व्यक्ति हाथ से हीरा खो देता है और अपना जीवन बर्बाद कर देता है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ एक बहुत ही गहरी बात कह रहे हैं, जैसे किसी दोस्त को समझाते हों। वो कहते हैं कि जो लोग भक्ति का दिखावा करते हैं लेकिन इंद्रियों के सुखों में उलझे रहते हैं, वो दरअसल अपने हाथों से अनमोल हीरा गँवा रहे हैं। ये हीरा हमारी सच्ची भक्ति और आत्मा की शुद्धता है, जिसे हम सांसारिक इच्छाओं में पड़कर व्यर्थ कर देते हैं। इस तरह, हमारा पूरा जीवन ही बेकार चला जाता है, बस एक पल के सुख के पीछे भागते हुए।

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