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इहि उदर के कारणे , जग पाच्यो निस जाम। स्वामी-पणौ जो सिरि चढ़यो , सिर यो न एको काम॥ 293॥

Because of this belly (life), the world has wandered astray. O master, the head that was placed upon you, it is not for one single purpose.

कबीर
अर्थ

इस पेट (जीवन) के कारण से, संसार भटका हुआ है। हे स्वामी, जो सिर आपके ऊपर रखा गया था, वह किसी एक काम के लिए नहीं है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ बड़ी ख़ूबसूरती से समझाते हैं कि कैसे इस शरीर की ज़रूरतें हमें दिन-रात भटकाती रहती हैं। वे कहते हैं कि हमें जो सोचने-समझने वाला दिमाग मिला है, वो सिर्फ़ पेट भरने या सांसारिक कामों के लिए नहीं है। बल्कि, हमारे सिर पर जो ये स्वामीपन, ये विवेक है, उसका एक बहुत बड़ा मक़सद है। ये हमें अपनी आत्मा के सच्चे उद्देश्य को पहचानने और उससे जुड़ने की प्रेरणा देता है।

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