“Your husband's soiled, stained, and ugly form; upon your husband's beauty, countless forms are spent. (But) your husband's dead, sick, and lifeless body; the whole world is lifeless. Only Kabir is not dead, who is founded upon Rama.”
पतिवृता मैली, काली कुचल कुरूप। पतिवृता के रूप पर, वारो कोटि सरूप। (अर्थात्, पति का रूप गंदा, काला, कुचला और कुरूप है। पति के रूप पर करोड़ों रूप खर्च होते हैं।) बैध मुआ रोगी मुआ, मुआ सकल संसार। एक कबीरा ना मुआ, जेहि के राम अधार। (अर्थात्, यह संसार, रोगी और मृत है, सब कुछ मृत है। केवल कबीरा नहीं मरा, जो राम पर आधारित है।)
यहाँ कबीर दास जी संसार की उस मोह-माया पर प्रकाश डाल रहे हैं जो क्षणभंगुर शारीरिक सुंदरता और दिखावे में उलझी रहती है, जिसे अंततः मलिन और कुरूप ही होना है। वे कहते हैं कि इस नश्वर संसार में वैद्य, रोगी और हर कोई मृत्यु को प्राप्त होता है। लेकिन जिसने राम नाम को अपना आधार बनाया है, वह अमरता पा लेता है, जैसे कबीर स्वयं। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची सुंदरता और स्थायी अस्तित्व केवल प्रभु भक्ति में ही है।
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