जो ऊग्या सो आंथवै , फूल्या सो कुमिलाइ। जो चिणियां सो ढहि पड़ै , जो आया सो जाइ॥ 423॥
“What has arisen, will wither away; what has blossomed, will fade. What is perceived, will fall; what has come, will depart.”
— कबीर
अर्थ
जो उगता है वह सूख जाता है, जो खिलता है वह मुरझा जाता है। जो दिखाई देता है वह गिर जाता है, और जो आता है वह चला जाता है।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में जीवन की नश्वरता का गहरा सच बताते हैं। वे उगते सूरज का अस्त होना, खिलते फूल का मुरझाना और बनी हुई चीज़ों का ढह जाना जैसे सुंदर बिंबों का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है, हर चीज़ का एक अंत निश्चित है। यह हमें सिखाता है कि किसी भी चीज़ से बहुत ज़्यादा लगाव न रखें, क्योंकि सब कुछ समय के साथ बदल जाता है।
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