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हीरा परा बजार में , रहा छार लपिटाइ। ब तक मूरख चलि गये पारखि लिया उठाइ॥ 428॥

In the market of diamonds, a lime was found. The fool went across, and after seeing it, picked it up.

कबीर
अर्थ

हीरे के बाज़ार में, एक नींबू मिल गया। मूर्ख व्यक्ति वहाँ से गुज़र गया, और उसे देखकर वह उठा लिया।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ संसार को एक बाज़ार की तरह देखते हैं, जहाँ सच्चा ज्ञान या बहुमूल्य व्यक्ति धूल में सने हीरे जैसा पड़ा होता है। अज्ञानी लोग उसकी वास्तविक चमक को पहचान नहीं पाते और उसे यूँ ही छोड़ कर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन जो पारखी या ज्ञानी होता है, वह उसकी असली क़ीमत को तुरंत समझ लेता है और उसे अपने साथ ले लेता है। यह दोहा हमें सिखाता है कि हमें बाहरी दिखावे को नहीं, बल्कि वास्तविक मूल्य और गुणों को पहचानना चाहिए।

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