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कली खोटा जग आंधरा , शब्द न माने कोय। चाहे कहँ सत आइना , जो जग बैरी होय॥ 55॥

The world is a false, dark flower; no one listens to words. Even if the true mirror is shown, the world remains an enemy.

कबीर
अर्थ

कली कहता है कि यह जग खोटा और अंधकारमय है, जहाँ कोई भी शब्द नहीं मानता। भले ही सच्चा आईना दिखाया जाए, यह संसार शत्रु बना रहता है।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में दुनिया के अजब रंग दिखाते हैं, मानो कोई गहरी बात समझा रहा हो। वे कहते हैं कि यह संसार एक खोटे और अंधेरे फूल जैसा है, जो देखने में भले सुंदर लगे पर असल में इसमें सच्चाई की कमी है और यह अज्ञान से भरा है। लोग सच्ची बातों को सुनना ही नहीं चाहते, और अगर उन्हें सच्चाई का साफ आईना भी दिखा दो, तो यह दुनिया उस सच को अपना दुश्मन ही मान लेती है।

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