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लगी लग्न छूटे नाहिं , जीभ चोंच जरि जाय। मीठा कहा अंगार में , जाहि चकोर चबाय॥ 59॥

The bond has been tied, and I cannot leave it; my tongue is burning like a beak. In the sweet things, there are embers; the Chakor (peacock-phancy bird) chews on them.

कबीर
अर्थ

यह बंधन बंध गया है और मुझसे छूटेगा नहीं; मेरी जीभ चोंच की तरह जल रही है। मीठी चीज़ों में अंगारे होते हैं; चकोर उन पर चबाता है।

विस्तार

कबीर यहाँ किसी ऐसे गहरे प्रेम या भक्ति के रिश्ते की बात कर रहे हैं जिसे छोड़ा नहीं जा सकता, यह इतना पक्का बंधन है। इस तीव्र लगन में जुबान चोंच की तरह जल रही है, जो इस गहरे लगाव के साथ आने वाली पीड़ा और कसक को दिखाती है। यह हमें समझाता है कि जीवन की सबसे मीठी चीजों में भी दर्द के अंगारे छिपे होते हैं, और हमारा मन, चकोर पक्षी की तरह, फिर भी उसी दर्दभरी मिठास को चबाता रहता है।

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