“Of this world or the other, for here or there, I have no care,When none will ask, and none will know, then what complaint is there?”
मुझे इस दुनिया या उस दुनिया की, यहाँ या वहाँ की कोई परवाह नहीं है। जब कोई पूछता नहीं और कोई जानता नहीं, तो शिकायत किस बात की है?
यह गहरा दोहा दुनिया की अनगिनत चिंताओं से अप्रभावित आत्मा की बात करता है। कवि गहरी उदासीनता व्यक्त करते हुए कहता है कि उसे सांसारिक मामलों की कोई परवाह नहीं, चाहे वे "यहां या वहां" के हों, या "इस या उस" जीवन की विशिष्ट घटनाओं के। इस दृष्टिकोण से एक मार्मिक प्रश्न उठता है: यदि कोई कभी आपकी स्थिति के बारे में नहीं पूछता, और कोई भी आपकी भावनाओं या संघर्षों को वास्तव में नहीं समझता, तो फिर किसी शिकायत का क्या उद्देश्य है? यह शिकायतों को व्यक्त करने की निरर्थकता पर एक विचार है जब किसी ने बाहरी चिंताओं और दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता से दूर, आंतरिक शांति का मार्ग अपनाया हो।
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