“The string that broke here, will it ever mend and reach there?What hope for “ever”? Alas! What is there to complain about?”
जो तार यहाँ टूटा है, क्या वह कभी वहाँ जुड़कर पहुँचेगा? ‘कभी’ की क्या आशा? अरे! शिकायत किस बात की है?
यह शेर एक टूटे हुए रिश्ते या तार के बारे में है। कवि पूछता है कि क्या एक बार जो धागा टूट गया है, वह कभी जुड़ पाएगा और अपने गंतव्य तक पहुँच पाएगा। लेकिन फिर वह तुरंत 'कभी' की उम्मीद पर सवाल उठाता है, यह सुझाव देते हुए कि ऐसी आशा व्यर्थ है। कवि आगे कहता है, 'शिकायत किस बात की है?' इसका मतलब है स्थिति को स्वीकार करना, शायद यह महसूस करना कि कुछ चीजें, एक बार टूट जाने के बाद, मरम्मत से परे होती हैं, और उन पर रुके रहना या शिकायत करना अनुत्पादक है। यह जाने देने और भाग्य को स्वीकार करने पर एक मार्मिक विचार है।
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