“Having seen you, these eyes are useless everywhere now,Tell me, shall I pluck them out entirely, for you, my love?”
तुम्हें देखने के बाद, ये आँखें अब हर जगह बेकार हो गई हैं। बताओ, क्या मैं इन्हें पूरी तरह से तुम्हारे लिए निकाल दूँ, मेरे सनम?
यह शेर एक ऐसे गहरे प्यार को दर्शाता है कि एक बार जब महबूब को देख लिया जाता है, तो बाकी सब नज़ारे बेमानी हो जाते हैं। शायर हैरत से पूछता है, "ए सनम, तुम्हें देखने के बाद मेरी ये आँखें हर जगह बेकार लगती हैं। तो क्या मैं इन्हें पूरी तरह से सिर्फ़ तुम्हें देखने के लिए ही समर्पित कर दूँ, या फिर दुनिया के लिए बंद कर दूँ और केवल तुम्हें ही देखूँ?" यह एक ऐसी भक्ति की खूबसूरत अभिव्यक्ति है जहाँ महबूब ही किसी की नज़र और अस्तित्व का एकमात्र केंद्र बन जाता है, और बाकी सब कुछ फीका पड़ जाता है। यह गहरी मोहब्बत के सार को दर्शाता एक सच्चा रोमांटिक भाव है।
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