Sukhan AI
આ ચશ્મની તુંને ચદર ખૂંચે નકી,
કોને બિછાને તું સદા પેાઢે? સનમ!

Surely this veil from my eyes pricks you,On whose bed do you always rest, beloved?

कलाપી
अर्थ

मेरी आँखों का यह पर्दा तुम्हें अवश्य चुभता होगा। हे प्रियतम, तुम हमेशा किसके बिस्तर पर सोती हो?

विस्तार

यह दोहा अपने प्रियतम को संबोधित करता है, जिसमें गहरी लालसा और प्रेम व्यक्त है। कवि पूछता है कि क्या उनकी गहरी निगाहें, शायद आँसुओं या अनकही इच्छाओं से भरी हुई, प्रियतम को चुभती हैं, जैसे कोई चादर चुभती हो। यहाँ एकतरफा प्यार का दर्द महसूस होता है, जहाँ कवि की भावनाएँ ही प्रियतम के लिए बोझ बन सकती हैं। इसके तुरंत बाद एक मार्मिक और कुछ हद तक ईर्ष्या भरा सवाल पूछा जाता है: "तुम हमेशा किसके बिछौने पर सोते हो, मेरे प्रिय?" यह केवल स्थान के बारे में सवाल नहीं है; यह अंतरंगता और साथ की लालसा है, यह जानना कि प्रियतम कहाँ आराम और अपनापन पाते हैं, और अप्रत्यक्ष रूप से यह इच्छा करना कि वे कवि के साथ हों। यह दूर के प्यार और गहरे लगाव के दर्द को खूबसूरती से दर्शाता है।

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पाठ
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