“Millions of foes there are to lead me astray from the path,But having made my friend an enemy, I was bewildered, O beloved!”
रास्ते से भटकाने के लिए लाखों दुश्मन हैं। लेकिन अपने ही दोस्त को दुश्मन बनाकर मैं खुद भ्रमित हो गया, हे सनम!
यह शेर ज़िंदगी की एक गहरी सच्चाई को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। शायर कहते हैं कि रास्ते से भटकाने के लिए लाखों दुश्मन मौजूद हैं, जो हमें गुमराह करने की हर कोशिश करते हैं। लेकिन असली दर्द, सबसे बड़ा धोखा, तब होता है जब कोई अपना, कोई जिसे हम दोस्त समझते थे, वही हमारा दुश्मन बन जाता है। किसी करीबी के धोखे से मिला आघात, किसी खुले दुश्मन से मिलने वाले नुकसान से कहीं ज़्यादा गहरा और तकलीफ़देह होता है। यह हमें अंदर तक तोड़ देता है और हमारी राह आसान नहीं रहती।
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