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સુગન્ધીની વેળા મધુતર હશે કોઈ જ નહીં;
સુરંગોની લક્ષ્મી વધુ વળિ હશે સુન્દર કંહી? ૮

No moment shall be sweeter than that of fragrance's delight;Will the splendor of hues be found more beautiful in sight?

कलाપી
अर्थ

सुगंध के क्षण से मधुर कोई समय नहीं होगा; रंगों की शोभा कहीं और अधिक सुंदर कैसे होगी?

विस्तार

यह सुंदर दोहा जीवन के सरल, गहरे आनंद का बखान करता है। कवि बड़ी सुंदरता से पूछते हैं, "सुगंध के पल से ज़्यादा मीठा कोई और समय क्या होगा?" और फिर, "रंगों की भव्यता से ज़्यादा सुंदर भला और कहाँ कुछ मिलेगा?" ये सिर्फ़ सवाल नहीं, बल्कि एक भावुक उद्घोषणा है। कवि कहते हैं कि मीठी खुशबू से भरा पल जितना आनंददायक होता है, उतना और कुछ नहीं; और रंगों की जीवंत छटा जितनी मनमोहक होती है, उतनी ख़ूबसूरती कहीं और नहीं। यह हमें इन संवेदी उपहारों की अद्वितीय सुंदरता और मधुरता को महसूस करने और सराहने का निमंत्रण देता है, जो हमारे जीवन को समृद्ध करते हैं।

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पाठ
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