“Not by tears, nor by tyranny, nor by union, nor by bonds, The heart once stirred, cannot be restrained, forget the talk of prisons.”
जो दिल एक बार जागृत हो जाए, उसे आँसुओं, अत्याचार, मिलन या किसी बंधन से रोका नहीं जा सकता; कारावास की बात तो बिलकुल ही छोड़ देनी चाहिए।
यह खूबसूरत शेर इंसान के दिल की अद्भुत शक्ति के बारे में बताता है। यह कहता है कि जब आपका दिल एक बार आज़ाद होने या उठ खड़ा होने का फैसला कर लेता है, तो उसे कोई भी चीज़ रोक नहीं सकती। न आँसू, न कठोर व्यवहार, न प्यार का आलिंगन और न ही किसी तरह का सांसारिक बंधन। कवि बहुत ही प्रभावशाली ढंग से कहते हैं कि अपने रास्ते पर चला हुआ दिल किसी भी प्रकार की कैद से परे होता है। यह आंतरिक शक्ति का एक गहरा संदेश है, जो हमें याद दिलाता है कि सच्ची आज़ादी बाहरी नहीं होती; यह एक आंतरिक लौ है जो एक बार प्रज्वलित हो जाए तो उसे बुझाया या कैद नहीं किया जा सकता।
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