“When two souls sincerely meet, that's an assembly, O Mareez,Millions without heart assembling, that is not called a true gathering.”
जब दो लोग दिल से मिलते हैं, तो वही एक सच्ची सभा है, मरीज़; बिना दिल के लाखों लोग इकट्ठे हों तो उसे सभा नहीं कहते।
कवि 'मरीज़' इस शेर में इंसानी रिश्तों की गहराई समझाते हैं। वे कहते हैं कि अगर सिर्फ दो लोग भी सच्चे दिल से मिलते हैं, तो वह एक सच्ची महफ़िल है। मायने लोगों की संख्या नहीं रखती, बल्कि उनके दिलों का जुड़ाव रखता है। इसके विपरीत, अगर लाखों लोग भी एक साथ हों, लेकिन उनके बीच दिलों का मेल न हो, कोई आत्मीयता न हो, तो उसे सभा नहीं कहा जा सकता। वह सिर्फ भीड़ है। यह शेर हमें सिखाता है कि रिश्ते और मुलाकातें तभी सार्थक होती हैं, जब उनमें ईमानदारी और दिली जुड़ाव हो, चाहे संख्या कितनी भी कम क्यों न हो।
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