“O naive one, take not this for a footfall's soft sound, For in the ears, mere echoes oft are found.”
ऐ नादान, इसे किसी के कदमों की आहट मत मानना, क्योंकि कानों में कभी-कभी यूँ ही भनकार (गूंज) सुनाई देती है।
मेरे प्यारे भोले मन, हर आवाज़ को किसी के कदमों की आहट मत समझो। कभी-कभी हमारे कान हमें धोखा दे जाते हैं, या हमारा मन ही ऐसी आवाज़ें गढ़ लेता है जो असल में होती ही नहीं। यह खूबसूरत शेर हमें सिखाता है कि सिर्फ़ हल्की-फुल्की धारणाओं पर तुरंत किसी नतीजे पर न पहुँचें। यह एक विनम्र चेतावनी है कि हम अपनी ही भावनाओं या इच्छाओं को बाहरी वास्तविकता न मान लें। शायद तुम किसी का इंतज़ार कर रहे हो, और हर छोटी-सी खड़खड़ाहट तुम्हें उनकी मौजूदगी का एहसास दिला रही हो, लेकिन अक्सर यह सिर्फ हमारी कल्पना होती है। जागरूक रहो और अपनी आशाओं या डर को तुम्हें ऐसे भ्रम में न पड़ने दो।
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