“My every tremor rested on your gentle grace,As ocean waves surge only on ocean's face.”
मेरी सारी उथल-पुथल तुम्हारे सहारे पर थी, जैसे समुद्र की लहरें केवल समुद्र पर ही उठती हैं।
यह खूबसूरत दोहा बताता है कि किसी के जीवन की हलचल और संघर्ष कैसे किसी दूसरे के सहारे पर निर्भर करते हैं। कवि कहते हैं कि उनके जीवन की सारी उथल-पुथल, सारे उतार-चढ़ाव उस सहारे पर ही टिके थे, ठीक वैसे ही जैसे समुद्र की लहरें। सोचिए, लहरें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, कितनी भी शोर क्यों न मचाएँ, वे हमेशा समुद्र का ही हिस्सा होती हैं। वे समुद्र के भीतर ही उठती और गिरती हैं, कभी उससे अलग नहीं होतीं। इसी तरह, वक्ता के जीवन की सारी चुनौतियाँ और यात्रा, उस खास व्यक्ति या शक्ति के सहारे पर ही आधारित है। यह गहरे भरोसे और जुड़ाव का एक शक्तिशाली बयान है।
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