“Had I known from the start, I could not have lived,That my entire life would pass on mere trust.”
कवि कहता है कि अगर उसे शुरुआत से यह पता होता कि उसकी पूरी ज़िंदगी केवल भरोसे पर ही बीत जाएगी, तो वह शायद जीवित ही न रह पाता।
यह शेर ज़िंदगी की एक गहरी सच्चाई को बड़ी खूबसूरती से बयान करता है। यह कहता है कि अगर हमें शुरुआत में ही पता होता कि हमारी पूरी ज़िंदगी भरोसे पर टिकी होगी – लोगों पर भरोसा, हालात पर भरोसा, भविष्य पर भरोसा – तो शायद हम कभी जीने की हिम्मत ही न कर पाते। यह हमें धीरे से याद दिलाता है कि हम अक्सर अनदेखी या अनजानी चीज़ों पर विश्वास रखकर ही जीवन में आगे बढ़ते हैं, और शायद यह एक ज़रूरी मासूमियत है। भरोसे पर यह निर्भरता, हालांकि कभी-कभी जोखिम भरी होती है, हमें आगे बढ़ने, रिश्ते बनाने और जीवन का पूरा अनुभव लेने में मदद करती है, भले ही इसका मतलब खुले दिल से अज्ञात में कदम रखना हो।
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