“Take heed, O generous soul, lest later there may be,Regret, sometimes, for the charity bestowed by thee.”
हे दानवीर, सावधान रहो, क्योंकि कभी-कभी दिए गए दान को लेकर बाद में पछतावा हो सकता है।
यह दोहा हमें एक महत्वपूर्ण बात बताता है कि कई बार दान देने के बाद, हमें अपने दिए गए दान पर पछतावा हो सकता है। यह दर्शाता है कि दानवीर या उदार व्यक्ति अक्सर दान देने के बाद ही अपने कार्य पर विचार करते हैं और उसे दोबारा परखते हैं। इस पछतावे के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि दान सही जगह नहीं पहुंचा, या दान देने वाले को लगा कि वे अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कहीं और कर सकते थे, या शायद उन्हें ठगा हुआ महसूस हुआ। यह छंद हमें यह सलाह देता है कि मदद करने से पहले अच्छी तरह सोच-समझ लें, ताकि हमारी उदारता सही मायने में अपने सबसे अच्छे उद्देश्य को पूरा करे और हमें संतोष दे, न कि दुख।
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