दरद की मारी बन-बन डोलूँ बैद मिल्या नहिं कोय।
“Struck by pain, I wander from forest to forest, but find no healer.”
— मीराबाई
अर्थ
दर्द से पीड़ित होकर मैं जंगल-जंगल भटकती हूँ, पर मुझे कोई वैद्य नहीं मिलता।
विस्तार
यह दोहा गहरे दर्द और उसकी दवा न मिलने की व्यथा बताता है। इसमें कहने वाला व्यक्ति अपने अंदर के दर्द से इतना पीड़ित है कि वह जंगल-जंगल भटक रहा है, यानी हर जगह तलाश कर रहा है। वह एक ऐसे वैद्य या मरहम की तलाश में है जो उसके कष्ट को दूर कर सके। लेकिन अफसोस, उसे कोई ऐसा वैद्य या उपचार नहीं मिल पाता जो उसके दुख को शांत कर सके। यह पंक्तियाँ उस हृदय विदारक भावना को व्यक्त करती हैं जब व्यक्ति बहुत पीड़ा में होता है और उसे कहीं से कोई सहारा या समाधान नहीं मिलता।
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