Sukhan AI
खरच न खूटै चोर न लूटै, दिन-दिन बढ़त सवायो॥

It does not deplete when spent, nor can thieves plunder it, day by day it grows manifold.

मीराबाई
अर्थ

यह खर्च करने पर खत्म नहीं होता है और न ही चोर इसे लूट सकते हैं। यह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जाता है।

विस्तार

यह दोहा एक ऐसे अद्भुत खजाने के बारे में बताता है जो खर्च करने से कभी खत्म नहीं होता। इसे कोई चोर चुरा नहीं सकता, बल्कि यह तो हर दिन और बढ़ता ही जाता है। यह भौतिक धन की बात नहीं कर रहा, बल्कि ज्ञान, विद्या, या आध्यात्मिक सम्पत्ति के बारे में है। यह हमें सिखाता है कि जो चीजें हम दूसरों के साथ बांटते हैं, जैसे ज्ञान और प्रेम, वे कभी कम नहीं होतीं। इसके बजाय, वे बढ़ती जाती हैं, जिससे देने वाला और लेने वाला दोनों समृद्ध होते हैं।

ऑडियो

पाठIn app
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.