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नगर ढुंढेरौ पीटती रे, प्रीत न करियो कोय।।3।।

Searching through towns, beating the drum, love must not be done by anyone. (Couplet 3)

मीराबाई
अर्थ

कोई नगर-नगर ढोल पीटकर यह संदेश दे रहा है कि किसी को भी प्रेम नहीं करना चाहिए।

विस्तार

यह दोहा प्रेम के गहरे अनुभव से उपजी एक मार्मिक चेतावनी को दर्शाता है। वक्ता, शायद प्रेम की जटिलताओं और पीड़ाओं को स्वयं अनुभव करने के बाद, प्रतीकात्मक रूप से पूरे नगर में ढोल पीटते हुए घूम रहा है। यह क्रिया एक सार्वजनिक घोषणा, एक हार्दिक चेतावनी का प्रतीक है: 'कोई भी प्रेम न करे!' यह एक शाब्दिक आदेश नहीं, बल्कि एक काव्यात्मक विलाप और एक सच्ची सलाह है, जो प्रेम के संभावित दुख और हृदय-विदारक अनुभवों की गहरी समझ से पैदा हुई है। कवि दूसरों को ऐसी ही पीड़ा से बचाना चाहता है, भावनात्मक लगाव के साथ आने वाली अक्सर अनदेखी चुनौतियों को उजागर करता है। यह मानवीय रिश्तों पर एक गहन चिंतन है।

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