इस बुत-कदे में मअ'नी का किस से करें सवाल
आदम नहीं है सूरत-ए-आदम बहुत है याँ
“In this idol-filled dwelling, from whom should one question the meaning? There are many faces like Adam here, but not the real Adam.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
इस दुनिया रूपी बुतखाने में हम असलियत का सवाल किससे पूछें? यहाँ इंसान जैसी सूरत वाले तो बहुत हैं, पर सच्चा इंसान कोई नहीं है।
विस्तार
यह शेर एक गहरी निराशा को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जब हम ऐसी जगह पर होते हैं जो झूठे इमेजेस या पुतलों से भरी हो, तो आप सही मायने क्या हैं, यह सवाल किससे करेंगे? दुनिया में इंसान की सूरत तो बहुत है, मगर असली इंसान... वो कहीं नहीं है।
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