वैसा चमन से सादा निकलता नहीं कोई
रंगीनी एक और ख़म-ओ-चम बहुत है याँ
“No one emerges from a garden so plain, There are many more colors and charms here.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दुनिया के इस बाग से कोई भी वैसा सीधा-सादा नहीं निकलता जैसा वह आया था। यहाँ बहुत सी रंगीनियाँ और टेढ़े-मेढ़े मोड़ हैं जो इंसान को बदल देते हैं।
विस्तार
Mir Taqi Mir ने ज़िंदगी की जटिलता को बड़ी खूबसूरती से बयां किया है। वह कहते हैं कि कोई भी चीज़ इतनी सादी नहीं होती, क्योंकि इस दुनिया में रंगत, नज़ाकत और ख़ूबसूरती का बहुत भंडार है। यह शेर बताता है कि ज़िंदगी और मोहब्बत, दोनों ही बहुत गहरे और रंगीन होते हैं, और सादगी पाना एक बहुत बड़ी बात है।
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