फिरते हो क्या दरख़्तों के साए में दूर दूर
कर लो मुवाफ़क़त किसू बेबर्ग-ओ-साज़ से
“Do you wander in the shadows of trees, far and wide, Or grant your consent to some unleafed-and-unstrung art?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या आप दूर-दूर तक पेड़ों की परछाईं में घूमते हैं, या किसी पत्तीहीन और बिना तार वाले कला के लिए सहमति देते हैं।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का एक गहरा सवाल है। शायर पूछते हैं कि क्या आप पेड़ों की छाँव में भटक रहे हैं... और फिर एक असंभव सा सवाल करते हैं—किसी बेपत्ता, निर्जीव चीज़ की सहमति माँगना। यह शेर बताता है कि प्रेम की सच्चाई इतनी जटिल है कि उसका जवाब कहीं बाहरी, या शायद खुद से भी नहीं मिल सकता। एक गहरा अकेलापन झलकता है!
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