कहे को हमारे कब उन ने सुना
कोई बात मानी सो मिन्नत के बाद
“When shall they hear of me, oh my dear, What words have they accepted after such plea?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कहे को हमारे कब उन ने सुना कोई बात मानी सो मिन्नत के बाद
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब हमारी आवाज़, हमारी गुहारें... किसी तक नहीं पहुँच पातीं। शायर कहते हैं कि हमने जो भी कहा, या जो भी मिन्नतें कीं, महबूब ने कभी सुना ही नहीं। यह दिल टूटने का वो एहसास है जब आप अपनी पूरी कायनात झोंक देते हैं, मगर सामने वाला बेखबर रहता है।
