ख़ूबी को उस के चेहरे की क्या पहुँचे आफ़्ताब
है उस में इस में फ़र्क़ ज़मीन आसमान का
“What merit can the sun's beauty find in his face? It's a difference between the earth and the sky.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
उस के चेहरे की क्या ख़ूबी को आफ़ताब पहुँचे। उसमें और इस में फ़र्क़ ज़मीन आसमान का है।
विस्तार
यह शेर बस एक तारीफ नहीं है, बल्कि एक बयान है! शायर कहते हैं कि किसी के चेहरे की ख़ूबसूरती इतनी कमाल की है कि सूरज की रौशनी भी उसके सामने फीकी पड़ जाती है। और जब वो कहते हैं कि फ़र्क़ ज़मीन आसमान का है, तो मतलब है कि यह ख़ूबसूरती सिर्फ़ तारीफ़ के काबिल नहीं है, यह तो एक अलग ही कायनात है। यह मिर्ज़ा मीर की अल्फ़ाज़ों में कही गई नज़्म है!
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